26 साल पुराना अनसुलझा दर्द: Haryana Pension Case में 26 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद तब एक नया मोड़ आया, जब 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की चौखट पर न्याय की गुहार लगाई।
अदालत का कड़ा रुख: हाईकोर्ट का सख्त निर्देश: जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की एकल पीठ ने इस मामले में हरियाणा सरकार के सक्षम प्राधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता के कानूनी नोटिस पर सुनवाई करते हुए तीन महीने के भीतर स्पष्ट व कारणयुक्त आदेश पारित किया जाए।
तदर्थ नियुक्ति से जुड़ा विवाद: पद लेक्चरर का और पेंशन वादक की: याचिकाकर्ता कैलाश ने अदालत को बताया कि उनके पति हवा सिंह की नियुक्ति 20 फरवरी 1978 को राजकीय महिला महाविद्यालय, रोहतक में तबला वादक के पद पर हुई थी, जिसके बाद 11 जनवरी 1994 को उन्हें संगीत विषय में लेक्चरर पद पर तदर्थ नियुक्ति मिली।
मूल वेतन का पेंच: मृत्यु के वक्त मिला था नया स्केल: छह अक्टूबर 2000 को सेवाकाल के दौरान हुई मृत्यु के समय वह संगीत लेक्चरर के रूप में 8000-275-13500 रुपये के वेतनमान में 9375 रुपये मूल वेतन प्राप्त कर रहे थे।
हरियाणा पेंशन केस का मुख्य आधार: नियमों का दिया गया हवाला: Haryana Pension Case के तहत याचिकाकर्ता ने 10 जनवरी 2018 के सरकारी स्पष्टीकरण का हवाला दिया, जिसके अनुसार 1986 के बाद और 2016 से पहले दिवंगत कर्मचारियों की पेंशन गणना मृत्यु के समय वास्तविक वेतनमान के आधार पर होनी चाहिए।
सरकार की दलील खारिज: तत्काल राहत देने का आदेश: सरकारी वकील द्वारा मामले में देरी का तर्क रखे जाने के बावजूद अदालत ने इस Haryana Pension Case का निपटारा करते हुए कहा कि यदि महिला पात्र पाई जाती हैं, तो उन्हें सभी वित्तीय लाभ बिना किसी विलंब के तुरंत प्रदान किए जाएं।






