वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा उलटफेर: India West Asia Oil Imports अचानक युद्ध के पहले वाले ऐतिहासिक स्तर पर लौट आए हैं, जिसने अंतरराष्ट्रीय बाजार को चौंका दिया है। चीन के साथ मची होड़ और बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल की खरीद में अप्रत्याशित कटौती कर दी है।
होर्मुज रूट पर आपूर्ति बहाल: होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए खाड़ी के उत्पादकों और कारोबारियों ने कच्चे तेल की खेप तेजी से बढ़ा दी है। इस बड़े बदलाव के चलते युद्ध के चलते पैदा हुआ आपूर्ति संकट अब पूरी तरह दूर हो चुका है।
India West Asia Oil Imports में जबरदस्त उछाल का पूरा गणित
सितंबर में बना नया रिकॉर्ड: शिपिंग ट्रैकिंग डाटा से सामने आया है कि सितंबर में पश्चिम एशिया से कच्चे तेल का आयात 32 प्रतिशत बढ़कर 28 लाख बैरल प्रतिदिन दर्ज हुआ। यह आंकड़ा फरवरी के बाद का सबसे उच्चतम स्तर साबित हुआ है।
रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी घटी: कुल आयात में खाड़ी देशों की हिस्सेदारी 54 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि रूस से खरीद 14 प्रतिशत गिरकर 18 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई। भारत की कुल खरीद में रूस की हिस्सेदारी 46.6 प्रतिशत से घटकर केवल 33.5 प्रतिशत बची है।
लागत और दूरी का नया खेल: रिफाइनरी सूत्रों के अनुसार रूसी तेल अब इराक से आने वाले तेल के मुकाबले सस्ता नहीं रहा, जिससे India West Asia Oil Imports को सबसे बड़ी प्राथमिकता मिलने लगी है। खाड़ी देशों से तेल का भारत पहुंचना समय और माल ढुलाई दोनों लिहाज से काफी किफायती पड़ता है।
इराकी तेल खरीद में भारी उछाल: सितंबर में भारत का कुल कच्चा तेल आयात 20 प्रतिशत बढ़कर 53.3 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जिसमें इराक की आपूर्ति 1.71 लाख से उछलकर 8.30 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गई। हालांकि रूस शीर्ष आपूर्तिकर्ता बना हुआ है, लेकिन अब यूएई और इराक तेजी से अंतर पाट रहे हैं।






