जादुई आवाज का रहस्य: Lata Mangeshkar Lori Song की धुन बजते ही हर रोता हुआ बच्चा अचानक शांत होकर नींद की आगोश में समा जाता है। स्वरकोकिला लता मंगेशकर ने अपने आठ दशक के सुनहरे सफर में अनगिनत यादगार गीतों को अपनी आवाज दी है। चाहे देशभक्ति के तराने हों या दिल छू लेने वाले रूमानी नगमे, उनकी आवाज ने हमेशा हर दिल पर राज किया है।
मासूमियत भरी पहेली: लता दीदी की आवाज में सजी यह लोरी सिर्फ एक साधारण गाना नहीं, बल्कि मातृत्व के गहरे प्यार और ममता की अनूठी मिसाल है। पचास से भी अधिक वर्षों का समय बीत चुका है, लेकिन आज भी छोटे बच्चों को सुलाने के लिए माताएं इसी सुरीली धुन का सहारा लेती हैं। इस गीत में छिपी मिठास सुनते ही बच्चा अपनी सारी जिद भूलकर गहरी नींद में खो जाता है।
जब Lata Mangeshkar Lori Song बना हर मां का सहारा
पर्दे पर नूतन का वात्सल्य: साल 1972 में बड़े पर्दे पर आई फिल्म ‘अनुराग’ में अभिनेत्री नूतन ने अनु राय का संजीदा किरदार निभाया था। दृश्य में वह अपने बेटे को एक पहेली सुनाते हुए सुलाने की कोशिश करती नजर आती हैं, जिसका मुखड़ा है:
“मेरा राजा बेटा बूझे एक पहेली…”
(गीत के पूरे बोल आप गूगल पर सर्च करके आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स पर पढ़ सकते हैं)।
सुपरहिट संगीत और बोल: इस यादगार रचना के पीछे संगीत जगत के दिग्गजों की बेमिसाल मेहनत जुड़ी हुई थी। प्रसिद्ध संगीतकार एस. डी. बर्मन ने इसकी मनमोहक धुन तैयार की थी, जबकि गीतकार आनंद बख्शी ने इसके खूबसूरत बोल लिखे थे। शक्ति सामंत के निर्देशन में बनी इस भावनात्मक फिल्म में विनोद मेहरा, मौसमी चटर्जी, अशोक कुमार और मास्टर सत्यजीत जैसे कलाकारों ने भी अहम भूमिकाएं निभाई थीं।







