MK Stalin Kolathur Election परिणाम को पलटने की DMK प्रमुख की आखिरी कानूनी उम्मीद पर उस वक्त पानी फिर गया, जब मद्रास हाई कोर्ट ने उनकी याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया।
हाईकोर्ट की बेंच का बड़ा फैसला: मद्रास हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यह याचिका विचार करने योग्य नहीं है। अदालत के इस फैसले से तमिलनाडु की सियासत में हलचल तेज हो गई है।
MK Stalin Kolathur Election विवाद और 100% VVPAT की मांग
ईवीएम में गड़बड़ी के गंभीर आरोप: MK Stalin Kolathur Election में मिली हार के बाद स्टालिन ने निर्वाचन आयोग पर निशाना साधते हुए 286 ईवीएम की तकनीकी जांच और सभी 100% वीवीपैट पर्चियों के सत्यापन की गुहार लगाई थी।
विरोधी उम्मीदवार की जीत को चुनौती: इस कड़े मुकाबले में टीवीके (TVK) प्रत्याशी वीएस बाबू ने स्टालिन को उनके ही गढ़ में मात दी थी। इसके बाद स्टालिन ने बाबू के निर्वाचन को अमान्य ठहराकर खुद को विजेता घोषित करने की अपील अदालत से की थी।
मशीनों में खराबी का किया दावा: सत्यापन प्रक्रिया के दौरान पहले बैच की चार में से तीन ईवीएम मशीनों ने कथित तौर पर काम करना बंद कर दिया था। इसके बाद चुने गए दूसरे बैच में भी एक मशीन खराब पाई गई, जिसे आधार बनाकर स्टालिन ने अदालत का रुख किया।
देरी के पीछे चुनाव आयोग पर आरोप: MK Stalin Kolathur Election मामले में याचिकाकर्ता ने दलील दी कि आयोग ने 45 दिनों के अत्यधिक विलंब के बाद 29 जुलाई को सत्यापन शुरू किया, जिसके चलते संविधान के अनुच्छेद 329 की समयसीमा वाली रोक यहां लागू नहीं होनी चाहिए।
3. Fact Check Summary
- स्थान: मद्रास हाई कोर्ट, चेन्नई
- पीठ: मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी अरुल मुरुगन
- मुख्य पक्ष: पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन (DMK) बनाम वीएस बाबू (TVK)
- निर्वाचन क्षेत्र: कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र
- मांग: सभी 286 ईवीएम मशीनों की जांच व 100% VVPAT पर्चियों की पुनर्गणना






