सियासी बदले की बू: MK Stalin on KN Nehru Raids को लेकर बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए तमिलनाडु की सी. जोसेफ विजय सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने साफ कहा कि यह कार्रवाई केवल चुनावी रील्स तैयार करने और मीडिया में सुर्खियां बटोरने का हथकंडा है।
उपचुनाव से पहले तमाशा: तिरुचिरापल्ली ईस्ट उपचुनाव से ठीक पहले सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) ने पूर्व मंत्री के.एन. नेहरू से जुड़े 25 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। डीएमके प्रमुख ने इसे बदले की ओछी राजनीति करार देते हुए कहा कि पार्टी कार्यकर्ता ऐसे दबाव से झुकने वाले नहीं हैं।
634 करोड़ का कथित घोटाला: यह पूरी पड़ताल नगर प्रशासन और जल आपूर्ति विभाग में भर्तियों से जुड़े कथित 634 करोड़ रुपये के नौकरी के बदले नकदी मामले में की जा रही है। मद्रास हाई कोर्ट के निर्देश के बाद जांच एजेंसी वित्तीय लेन-देन और भर्ती दस्तावेजों की सघन जांच में जुटी है।
Subheading: MK Stalin on KN Nehru Raids और वॉशिंग मशीन के आरोप
रोड शो या रेड शो: तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री ने सत्तापक्ष पर हमला करते हुए कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। सरकार जनता की विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए कभी रोड शो का सहारा ले रही है तो कभी रेड शो का तमाशा रच रही है।
वॉशिंग मशीन बनी सत्ताधारी पार्टी: डीएमके अध्यक्ष ने तीखा तंज कसते हुए टीवीके को वॉशिंग मशीन बताया और आरोप लगाया कि भ्रष्ट लोगों को पार्टी में शामिल कर केवल विपक्ष के पूर्व मंत्रियों को ही निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह दुर्भावनापूर्ण प्रयास अदालत और जनता के बीच नाकाम साबित होगा।
सोशल मीडिया कंटेंट की होड़: तिरुचिरापल्ली ईस्ट उपचुनाव के लिए रील्स बनाने और रैलियों में पंच डायलॉग बोलने के मकसद से यह सब किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि MK Stalin on KN Nehru Raids जैसे कदमों से डीएमके के एक जमीनी कार्यकर्ता का भी मनोबल नहीं डिगाया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट में चुनौती: दूसरी तरफ के.एन. नेहरू ने मद्रास हाई कोर्ट के 26 अक्टूबर के उस फैसले को देश की शीर्ष अदालत में चुनौती दी है, जिसमें उनके खिलाफ एफआईआर रद्द करने की याचिका खारिज कर दी गई थी। जांच एजेंसियां फिलहाल संदिग्ध लेन-देन के तमाम साक्ष्यों की छानबीन कर रही हैं।







