Music Composer Ravi के पारिवारिक जीवन का खौफनाक सच
एक दर्दनाक दास्तां की शुरुआत Music Composer Ravi ने अपनी रूहानी धुनों से दुनिया को जितना सुकून दिया, उनकी खुद की जिंदगी के आखिरी पन्नों में उतना ही गहरा और असहनीय सन्नाटा पसरा हुआ था। हिंदी सिनेमा को अमर गीत देने वाले इस दिग्गज कलाकार को अपने ही घर में अपनों से जो घाव मिले, उसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता।
बिना ट्रेनिंग के मुंबई में किया संघर्ष रेलवे स्टेशन पर भूखे गुजारी रातें क्योंकि रवि शंकर शर्मा (रवि) बिना किसी औपचारिक संगीत शिक्षा के प्लेबैक सिंगर बनने का सपना लेकर 1950 में मुंबई आए थे। दिग्गज कलाकार हेमंत कुमार ने उनका हुनर पहचानकर उन्हें अपना असिस्टेंट बनाया, जिसके बाद रवि ने साल 1954 की सुपरहिट फिल्म ‘नागिन’ की मशहूर बीन धुन तैयार कर तहलका मचा दिया था।
करियर में हासिल की बुलंदियां सात बार फिल्मफेयर में मिली जगह और उन्होंने 1955 से 2005 तक सिनेमा पर राज किया। ‘चौदहवीं का चांद हो’, ‘ऐ मेरी जोहरा जबी’, ‘दिल के अरमां आंसुओं में बह गए’ और 1969 की फिल्म ‘एक फूल दो माली’ का कालजयी गीत ‘तुझे सूरज कहूं या चंदा’ उनकी बेहतरीन कलाकारी की अनमोल मिसाल बनकर उभरे।
बुढ़ापे में बेटे ने ढाया सितम बहू संग मिलकर पिता को सताया और यही सबसे दुखद मोड़ था जब Music Composer Ravi के इकलौते बेटे अजय ने अपनी पत्नी (अभिनेत्री वर्षा उस्गांवकर) के साथ मिलकर पिता के साथ बेहद क्रूर बर्ताव करना शुरू कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रवि को इस उम्र में इतनी यातनाएं दी गईं कि तंग आकर उन्हें खुद पुलिस में शिकायत दर्ज करानी पड़ी थी।
बेटियां बनीं आखिरी वक्त का सहारा अंतिम सांस तक निभाया पवित्र फर्ज क्योंकि बेटे की बेवफाई के बाद रवि की दोनों बेटियों ने आगे आकर अपने लाचार पिता को संभाला। प्रोफेशनल लाइफ में अपनी काबिलियत के मुताबिक पहचान न पाने वाले Music Composer Ravi का निजी जीवन भी बेटे के दिए इस गहरे मानसिक और पारिवारिक दर्द के साए में ही बीता।






