पशुधन बीमा योजना को लेकर उत्तर प्रदेश के एटा जिले में एक बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है, जिसने हजारों पशुपालकों की चिंता को अचानक राहत में बदल दिया है। राष्ट्रीय पशुधन मिशन के अंतर्गत शुरू हुए इस अभियान के तहत पशुओं की अकाल मृत्यु से होने वाले आर्थिक संकट को रोकने के लिए पुख्ता रणनीति तैयार की गई है।
50 हजार से अधिक पशुओं के लिए खुला सुरक्षा कवच
जिले में 20 अगस्त से इस विशेष अभियान की शुरुआत हो चुकी है, जिसके तहत सितंबर माह तक कुल 50,625 पशुओं को सुरक्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पशुधन बीमा योजना के अंतर्गत स्वदेशी पशुओं को प्राथमिकता सूची में शीर्ष स्थान दिया गया है।
प्रीमियम में सरकार की सबसे बड़ी हिस्सेदारी
पशुपालकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े, इसके लिए प्रीमियम का मात्र 15 प्रतिशत अंश ही लाभार्थी को वहन करना होगा। शेष राशि में 51 प्रतिशत केंद्र सरकार और 34 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी। पशुधन बीमा योजना के दायरे में जीएसटी से पूरी तरह छूट दी गई है।
किसे मिलेगा प्राथमिकता और पात्रता का आधार?
भूमिहीन, सीमांत एवं लघु किसानों के अलावा बीपीएल, एससी-एसटी वर्ग तथा महिला पशुपालकों को प्राथमिकता दी जाएगी। एक परिवार अधिकतम 10 बड़े पशु इकाइयों या निर्धारित छोटे पशुओं जैसे गाय, भैंस, भेड़, बकरी, सूकर और भारवाहक पशुओं का 1 वर्ष के लिए बीमा करा सकेगा।
टैगिंग और दावा प्रक्रिया के सख्त नियम
बीमा प्रक्रिया के दौरान पशु की टैगिंग और स्पष्ट फोटो अनिवार्य होगी और पशु का मूल्यांकन स्कोर कार्ड के आधार पर तय होगा। सीवीओ डॉ. आरपी शर्मा के अनुसार, बीमित पशु की मृत्यु होने पर तत्काल अधिकारियों को सूचित करना होगा और निरीक्षण के लिए शव को अधिकतम 24 घंटे तक सुरक्षित रखना आवश्यक होगा।






