संसद से बड़ी खबर:
UPI Charges Lok Sabha Bill के पारित होते ही देशभर के करोड़ों डिजिटल पेमेंट यूजर्स के बीच हड़कंप मच गया है कि क्या अब हर यूपीआई ट्रांजेक्शन पर जेब ढीली करनी पड़ेगी।
संसद से मिला नया मोड़: UPI Charges Lok Sabha Bill के तहत पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट 2007 में संशोधन का रास्ता साफ हो गया है। इस कदम से बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा यूपीआई सेवाओं पर शुल्क वसूलने का कानूनी आधार तैयार हो गया है।
UPI Charges Lok Sabha Bill: P2P और P2M ट्रांजेक्शन के नए नियम
आम जनता को राहत: UPI Charges Lok Sabha Bill पारित होने के बावजूद पर्सन टू पर्सन (P2P) यानी दो व्यक्तियों के बीच होने वाले ट्रांजेक्शन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, कुल 314 लाख करोड़ रुपये के लेन-देन में से 71 प्रतिशत हिस्सा P2P का है, जो पूरी तरह मुफ्त रहेगा।
व्यापारिक भुगतानों पर नजर: UPI Charges Lok Sabha Bill के प्रभाव क्षेत्र में मुख्य रूप से पर्सन टू मर्चेंट (P2M) यानी दुकानों और व्यापारियों को किए जाने वाले भुगतान शामिल होंगे। सूत्रों के अनुसार, 2,000 रुपये से अधिक राशि के यूपीआई भुगतान पर ही शुल्क लागू किया जा सकता है।
अंतिम फैसला आरबीआई के हाथ: UPI Charges Lok Sabha Bill में शुल्क की सटीक दरों या सीमा का सीधा उल्लेख नहीं है। इसका निर्धारण भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा किया जाएगा।
आंकड़ों की जुबानी: UPI Charges Lok Sabha Bill के संदर्भ में वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़े बताते हैं कि देश में कुल 24,161.69 करोड़ ट्रांजेक्शन हुए। P2M स्तर पर 59 प्रतिशत लेन-देन 0 से 500 रुपये के बीच थे, जबकि 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजेक्शन केवल 4 प्रतिशत रहे।
सुरक्षा का नया ढांचा: UPI Charges Lok Sabha Bill के समर्थन में विशेषज्ञों का कहना है कि 700 से अधिक बैंक और वित्तीय संस्थान सालाना लगभग 10,000 करोड़ रुपये यूपीआई संचालन पर खर्च करते हैं। नए शुल्क से प्राप्त राशि का उपयोग साइबर सुरक्षा और नेटवर्क बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में होगा।






