39 सेकंड का वो खौफनाक मंजर
कुदरत का एक ऐसा क्रूर प्रहार जिसने वेनेजुएला की पूरी धरती को हिलाकर रख दिया। वेनेजुएला के इतिहास में एक ऐसा काला पन्ना जुड़ गया है, जहां महज 39 सेकंड के भीतर आए दो भीषण झटकों ने हंसती-खेलती बस्तियों को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया। इस महाविनाश के पीछे सबसे बड़ी वजह Venezuela Earthquake Causes की वो अंदरूनी कहानी है, जिसने देश की करीब 80 प्रतिशत आबादी यानी 2 करोड़ से ज्यादा लोगों के सिर पर मौत का साया मंडरा दिया है। बुधवार की रात जब पूरा देश सार्वजनिक छुट्टी के माहौल में था, तभी अचानक जमींदोज होती इमारतों और चीख-पुकार ने सबको झकझोर कर रख दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इसे एक सदी से ज्यादा समय में आया सबसे शक्तिशाली भूकंप बताया है जो बहुत बड़ी संख्या में जान ले सकता है। पीएम मोदी ने भी इस भीषण आपदा पर दुख जताते हुए भारत की तरफ से हर संभव मदद की पेशकश की है।
जमीन के नीचे छिपी तबाही की गहराई
इस खौफनाक मंजर को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने इसके मुख्य Venezuela Earthquake Causes पर से पर्दा उठाया है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, पहला झटका 7.2 तीव्रता का था जो जमीन से 22 किलोमीटर नीचे आया, लेकिन इसके तुरंत बाद आए 7.5 तीव्रता के दूसरे झटके ने तबाही को दोगुना कर दिया क्योंकि उसकी गहराई महज 10 किलोमीटर थी। जब भी कोई भूकंप जमीन की सतह के इतने नजदीक यानी उथला होता है, तो उसका असर कई गुना ज्यादा घातक हो जाता है। यही कारण है कि काराकस के पश्चिमी याराकुय राज्य से उठी इस लहर ने हजारों लोगों को बेघर कर दिया और मरने वालों का आंकड़ा 10,000 से लेकर 1 लाख तक पहुंचने की डरावनी आशंका जताई जा रही है। राजधानी कराकास में अकेले 164 लोगों की मौत हो चुकी है और 971 से ज्यादा लोग घायल हैं जबकि सैकड़ों अब भी लापता हैं।
दो महाविशाल प्लेटों की वो खूनी जंग
अगर हम वेनेजुएला के भौगोलिक नक्शे को देखें तो समझ आता है कि असल Venezuela Earthquake Causes वहां की टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल में छिपा है। वेनेजुएला का उत्तरी तट ठीक उस एक्टिव सिस्मिक जोन पर बसा है जहां कैरिबियन प्लेट और दक्षिण अमेरिकी प्लेट एक-दूसरे से टकराती हैं। कैरिबियन प्लेट हर साल दक्षिण अमेरिकी प्लेट के मुकाबले 20 मिलीमीटर पूर्व की ओर खिसक रही है। इस टकराव और रगड़ से पृथ्वी की ऊपरी परत पर इतना भयानक दबाव बनता है कि वो अचानक बड़ी तबाही के रूप में फट पड़ता है। पूरी दुनिया इस समय हैरान है क्योंकि इसी दौरान जापान और कैलिफोर्निया में भी धरती हिली है, जिससे वैश्विक वैज्ञानिक इस बड़े खतरे की कड़ियों को जोड़ने में जुट गए हैं। प्रशांत महासागर के किनारे फैली सरकम-पैसिफिक सिस्मिक बेल्ट दुनिया के करीब 81 प्रतिशत सबसे बड़े भूकंपों के लिए जिम्मेदार मानी जाती है जहां चट्टानों के खिसकने से ऐसी भयानक आपदाएं आती हैं।








