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ग्लोबल वॉर्मिंग के बीच अल-नीनो के और मजबूत होने की चेतावनी, डब्ल्यूएमओ ने कहा- भारत में बढ़ेगा भीषण हीटवेव और सूखे का खतरा

अल-नीनो के और मजबूत होने की चेतावनी जारी करते हुए विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने वैश्विक स्तर पर एक बड़े संकट का संकेत दिया है। उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में तेजी से पनप रही इस मौसमी परिस्थिति के कारण दुनिया भर के मौसम चक्र में भारी उथल-पुथल मचने की आशंका जताई गई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले महीनों में यह स्थिति इतनी भयावह हो सकती है कि कई देशों को रिकॉर्ड तोड़ गर्मी का सामना करना पड़ेगा।

चरम मौसमी घटनाओं की आवृत्ति में होगी भारी वृद्धि

डब्ल्यूएमओ की ग्लोबल सीजनल क्लाइमेट अपडेट रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि जुलाई से सितंबर के दौरान अल-नीनो अपने चरम पर पहुंच सकता है। संगठन की महानिदेशक सेलेस्टे साउलो ने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि अल-नीनो की परिस्थितियां पहले ही बन चुकी हैं। इसके चलते न केवल मैदानी इलाकों में भीषण हीटवेव चलेगी, बल्कि समुद्री हीटवेव की तीव्रता में भी अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी।

इस मौसमी बदलाव के कारण दुनिया के कुछ हिस्सों में जहां जानलेवा सूखा पड़ेगा, वहीं कुछ क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश और विनाशकारी बाढ़ आने का खतरा रहेगा। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह अल-नीनो सदर्न ऑसिलेशन (ईएनएसओ) चक्र का वह चरण है, जिसमें समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस अधिक तक बढ़ जाता है। तापमान की यह वृद्धि सीधे तौर पर पूरी पृथ्वी के वायुमंडल को बुरी तरह प्रभावित करती है।

भारतीय मानसून और खेती पर मंडराया काला साया

भारत के संदर्भ में यह रिपोर्ट बेहद चिंताजनक संकेत दे रही है क्योंकि भारतीय मौसम विभाग (आइएमडी) भी मानसून के दौरान इसके मजबूत होने की पुष्टि कर चुका है। ऐतिहासिक रूप से जब भी अल-नीनो सक्रिय हुआ है, तब भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा काफी कमजोर रही है। जून महीने में सामान्य से कम हुई बारिश के बाद, अब जुलाई और अगस्त के महीनों में भी सूखे जैसी स्थिति पैदा होने की आशंका बढ़ गई है।

डब्ल्यूएमओ के अनुसार, भारतीय उपमहाद्वीप और ऑस्ट्रेलिया के बड़े हिस्सों में औसत से बेहद कम बारिश होने का अनुमान है, जिससे देश की कृषि व्यवस्था और जल संसाधनों पर गहरा दबाव बनेगा। इसके विपरीत, मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर के क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश होने की संभावना है। संगठन ने सभी प्रभावित देशों की सरकारों और मानवीय एजेंसियों को इस आने वाले प्राकृतिक संकट से निपटने के लिए पहले से ही पुख्ता तैयारी करने की सख्त सलाह दी है।

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