Jantar Mantar Student Protest की शुरुआत छात्रों के भविष्य, पेपर लीक की जांच और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांगों को लेकर हुई थी। लेकिन देखते ही देखते 26 दिनों के भीतर यह आंदोलन परीक्षा सुधार के मुद्दों से भटककर राजनीतिक और वैचारिक विमर्श का एक बड़ा केंद्र बन गया।
परीक्षा सुधार से हुई थी शुरुआत: मांगों में थी पारदर्शिता: Jantar Mantar Student Protest के शुरुआती दिनों में छात्रों और शिक्षकों की प्रमुख मांगें NEET पेपर लीक की निष्पक्ष जांच और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया को लेकर थीं। हालांकि, समय बीतने के साथ इस मंच पर किसान संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक हस्तियों का प्रवेश होने लगा।
विपक्षी नेताओं का लगा जमावड़ा: मंच से तीखे हमले: इस Jantar Mantar Student Protest में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, सांसद डिंपल यादव, महुआ मोइत्रा, सुप्रिया सुले और योगेंद्र यादव जैसे कई दिग्गज नेता पहुंचे। मंच से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और प्रधानमंत्री पर निशाने साधे जाने लगे।
बॉलीवुड हस्तियों की मौजूदगी: उठे अभिव्यक्ति के मुद्दे: आंदोलन में शबाना आजमी, प्रकाश राज, स्वरा भास्कर और कुणाल कामरा जैसी हस्तियों ने भी हिस्सा लिया। इसके बाद Jantar Mantar Student Protest का रुख पूरी तरह से लोकतांत्रिक अधिकारों, नागरिक स्वतंत्रता और राजनीतिक बयानों की तरफ मुड़ गया।
Jantar Mantar Student Protest की पूरी टाइमलाइन
26 दिनों का उतार-चढ़ाव: अनशन का हुआ अंत: 28 जून को सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल से शुरू हुआ यह Jantar Mantar Student Protest, 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ मार्च और कई राजनीतिक विवादों से गुजरा। आखिरकार 23 जुलाई को केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात के बाद 26 दिनों से जारी यह अनशन समाप्त हुआ।







