रहस्यमयी अवतरण का गवाह बना कत्यूर: कोट भ्रामरी मेला के दूसरे दिन जैसे ही वातावरण में शंखनाद गूंजा, समूची कत्यूर घाटी में मां नंदा के अवतरण से हर कोई स्तब्ध और भक्तिविभोर हो उठा। नांगरा-निशाणों की गूंज के बीच भक्त मवई गांव से पवित्र कदली वृक्ष लेकर मुख्य मंदिर पहुंचे। मां के अवतरित होते ही पूरा प्रांगण जयकारों से दहल उठा और श्रद्धालु नतमस्तक हो गए।
परंपरा और आस्था का संगम: जखेड़ा और मवई गांव के परिहार खाम के प्रतिनिधि तथा मां नंदा के अनन्य भक्त इस अलौकिक अनुष्ठान को संपन्न करने पहुंचे थे। नागनाथ मंदिर में भी कदली वृक्ष के साथ देवी का आह्वान हुआ, जिसके उपरांत वृक्ष से मां नंदा की पारंपरिक प्रतिमा यानी डिकरा का निर्माण शुरू हुआ।
कोट भ्रामरी मेला: पारंपरिक आभूषणों से सजी मां नंदा
प्राचीन आभूषणों का रहस्य: राजस्व विभाग की टीम कड़ी सुरक्षा और नियमों के बीच भगरतोला गांव से मां के सदियों पुराने पारंपरिक आभूषण लेकर आई। इन दिव्य आभूषणों से प्रतिमा का भव्य श्रृंगार होते ही परिहार खाम द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना आरंभ की गई। दर्शन के लिए मंदिर परिसर में जनसैलाब उमड़ पड़ा।
सांस्कृतिक सुरों की बयार: कोट भ्रामरी मेला के मंच पर देवी स्तुति के साथ रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आगाज हुआ। लोक गायिका रितु लोहिया ने देवी वंदना और स्वागत गीतों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद स्थानीय लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों पर देर तक दर्शक झूमते नजर आए।
महाप्रसाद और विभागीय स्टॉल: कुमाऊं ट्रैक यूनियन द्वारा आयोजित विशाल भंडारे में हजारों मेलार्थियों ने प्रसाद ग्रहण किया। विभिन्न सरकारी विभागों ने स्टॉल लगाकर जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी, जहां लोगों की भारी भीड़ उमड़ी।
देर रात तक भजनों का उल्लास: छोटी जागरण की रात आयोजित भजन संध्या में अलंकार मंडली के गायक प्रदीप गुरूरानी ने भजनों की ऐसी झड़ी लगाई कि श्रद्धालु रातभर भक्ति सागर में गोते लगाते रहे।






