रहस्यमयी सफर का आगाज: Kader Khan की जिंदगी का यह पहलू आज भी लाखों प्रशंसकों को हैरान कर देता है कि कैसे एक प्रोफेसर ने हिंदी सिनेमा की दिशा बदल दी। परदे पर गोविंदा को कॉमेडी सिखाने वाले इस दिग्गज की शुरुआत चकाचौंध से कोसों दूर एक साधारण क्लासरूम में हुई थी।
इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रोफेसर की भूमिका: Kader Khan साल 1970 से 1975 के बीच मुंबई के मशहूर एम एच साबू सिद्दिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में सिविल इंजीनियरिंग के छात्रों को पढ़ाया करते थे। साल 1970 में फज्र-ए-इस्लाम में नैरेटर की भूमिका निभाने के साथ ही वे कॉलेज में इंजीनियरिंग के जटिल सिद्धांतों को सुलझाते रहे।
दुबई में हिंदी पढ़ाने का फैसला: Kader Khan ने सिर्फ मुंबई में तकनीकी ज्ञान ही नहीं बांटा, बल्कि बाद में दुबई जाकर स्कूलों में बच्चों को हिंदी भाषा की बारीकियां भी सिखाईं। शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय रहने के बावजूद उनके भीतर छुपा कलाकार रंगमंच पर एक बड़े मौके की तलाश में था।
सिनेमाई पर्दे पर पहला कदम: Kader Khan ने बतौर अभिनेता अपने फिल्मी सफर की शुरुआत साल 1972 में फिल्म ‘कसक’ से की थी, लेकिन यह फिल्म कभी सिनेमाघरों में रिलीज नहीं हो पाई। इसके बाद उन्हें फिल्म ‘दाग’ में एक वकील की भूमिका निभाने का मौका मिला, जहां से उनके अभिनय का सिलसिला शुरू हुआ।
गोविंदा संग ऐतिहासिक कॉमिक जुगलबंदी: Kader Khan और गोविंदा की जोड़ी ने ‘दूल्हे राजा’, ‘कुली नं. 1’, ‘हीरो नं. 1’ और ‘राजा बाबू’ जैसी सुपरहिट फिल्मों में स्क्रीन पर ऐसा जादू बिखेरा जो आज भी बेमिसाल है। कई दृश्यों में उनकी लाजवाब कॉमिक टाइमिंग और संवाद अदायगी ने सुपरस्टार गोविंदा तक को पीछे छोड़ दिया।
300 फिल्में और 250 स्क्रिप्ट्स का कीर्तिमान: Kader Khan ने अपने करियर में 300 से अधिक फिल्मों में यादगार अभिनय किया और 250 से ज्यादा फिल्मों की पटकथा और संवाद लिखे। साल 1972 की ‘जवानी दीवानी’ से लेकर ‘रोटी’, ‘बेनाम’ और ‘महाचोर’ जैसी फिल्मों के अमर संवाद आज भी उनकी लेखनी के गवाह हैं।







