एक बड़ा कानूनी मोड़: NEET Protests Supreme Court के गलियारों में उस वक्त एक सनसनीखेज मोड़ पर पहुंच गया, जब केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज मुकदमों को तुरंत वापस लेने की गुहार लगाई। अदालत ने बिना देर किए इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर तत्काल सुनवाई के लिए अपनी सहमति दे दी।
NEET Protests Supreme Court में सॉलिसिटर जनरल की दलील
सॉलिसिटर जनरल की सीधी अपील: सोमवार को अदालत की कार्यवाही समाप्त होने से ठीक पहले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष याचिका पेश की। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार संविधान के अनुच्छेद 142 का प्रयोग कर छात्रों की FIR रद कराना चाहती है।
अदालत का सकारात्मक रुख: NEET Protests Supreme Court की इस विशेष बेंच ने टिप्पणी की कि यदि पक्षकार आपस में विवाद सुलझा रहे हैं, तो न्यायपालिका को कोई आपत्ति नहीं होगी। इसके साथ ही पीठ ने इस महत्वपूर्ण मामले को 1 सितंबर (मंगलवार) को विस्तृत विचार के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
राहत के साथ कड़ी शर्त: NEET Protests Supreme Court ने पहले भी राज्यों को आंदोलनकारी छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की छूट दी थी। हालांकि, अदालत ने साफ कर दिया है कि गंभीर और जघन्य अपराधों में संलिप्त पाए जाने वाले आरोपियों को किसी भी सूरत में यह कानूनी छूट नहीं मिलेगी।






