सियासत में अचानक आया भूचाल: CJP School Thik Karo Abhiyan ने देश की राजनीति में वह हलचल पैदा कर दी है, जिसकी कल्पना किसी बड़े सियासी दल ने भी नहीं की थी। जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक को लेकर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के बाद अब छोटे-छोटे स्कूली बच्चे भी सड़कों पर उतर आए हैं।
ग्राउंड रिपोर्टिंग और सोशल ऑडिट का वार: CJP School Thik Karo Abhiyan के तहत सोशल मीडिया पर बदहाल सरकारी स्कूलों के वीडियो सार्वजनिक किए गए, जिसने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी। राजस्थान में इसके बाद बाहरी लोगों और मीडिया की एंट्री पर रोक लगा दी गई, जहां 21 अगस्त को टीम के निरीक्षण के दौरान विवाद और पत्थरबाजी की नौबत तक आ गई।
यूपी के जिलों में सड़कों पर उतरे बच्चे: कक्षाओं का बहिष्कार और चक्का जाम: उत्तर प्रदेश के कन्नौज में शिक्षकों की कमी पर छात्रों ने प्रिंसिपल की गाड़ी घेरी, तो हमीरपुर में सड़क की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट का घेराव हुआ। वहीं उन्नाव में घटिया भोजन और पानी की किल्लत से नाराज आवासीय विद्यालय के बच्चों ने मुख्य चौराहे पर जाम लगा दिया।
महाराष्ट्र में तीखा सियासी टकराव: नेताओं को सीधी चुनौती: महाराष्ट्र के लातूर जिले के उजानी गांव में जिला परिषद स्कूल का जायजा लेने के बाद सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने तीखा हमला बोला। उन्होंने शिक्षा मंत्री दादा भुसे के इस्तीफे की मांग की, जिसके बाद कार्यकर्ताओं पर बिना अनुमति प्रवेश और काम में बाधा का मुकदमा दर्ज हुआ।
CJP School Thik Karo Abhiyan और राजनीतिक दलों की नई रणनीति
सरकारों को झुकने पर किया मजबूर: सीजेपी का बड़ा दावा: संगठन का कहना है कि उनकी छोटी सी टीम ने नीति-निर्माताओं को बुनियादी ढांचे पर तुरंत बजट और योजनाओं की घोषणा करने पर विवश कर दिया है। यह साबित हो गया है कि मूलभूत शिक्षा के मुद्दों पर भी देश के युवाओं को बड़े पैमाने पर लामबंद किया जा सकता है।
पारंपरिक दलों ने बदली अपनी रणनीति: नया राजनीतिक समीकरण: राजस्थान में जहां कांग्रेस अब सरकारी स्कूलों की खस्ताहाली को लेकर जमीन पर उतर रही है, वहीं भाजपा ने युवाओं और जेन-जी से संवाद के लिए स्मृति ईरानी, नितिन नवीन और हर्ष संघवी जैसे वरिष्ठ नेताओं की विशेष टीम मैदान में उतार दी है।






