मौत के मुंह से वापसी: Nepal floods Assam laborers rescued होने के बाद जब अपने वतन लौटे, तो उनके चेहरों पर उस भयावह मंजर का खौफ साफ नजर आ रहा था जिसने पल भर में सब कुछ तबाह कर दिया था।
जल प्रलय का तांडव: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बीच फंसे असम के आठ श्रमिक राज्य सरकार और नेपाली अधिकारियों के संयुक्त प्रयासों से सकुशल भारत लौट आए हैं।
अपर त्रिशूली प्रोजेक्ट पर खतरा: सुरक्षित लौटे श्रमिकों में पंकज बर्मन, गोपाल चंद देबनाथ, गौतम दास, समर बेज़बरुआ, सर्विसन मारक, सनेश्वर नर्ज़री, सिल्वा मारक और एलिप्सन संगमा शामिल हैं, जो नेपाल के अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में कार्यरत थे।
Nepal Floods Assam Laborers Rescued: पहाड़ियों पर बिना अन्न-जल के बीते दिन
पहाड़ियों की ओर जान बचाकर भागना: नलबाड़ी के पंकज बर्मन ने उस खौफनाक पल को याद करते हुए बताया कि अचानक तेज गड़गड़ाहट की आवाज सुनते ही सभी मजदूर बिना किसी सामान के जान बचाने के लिए ऊंची पहाड़ियों की ओर भागे।
सेना का देवदूत बनकर आना: प्रोजेक्ट पर काम कर रहे तेरह मजदूरों ने बिना भोजन और पानी के दो दिन तक भीषण ठंड और डर के साए में गुजारे, जिसके बाद नेपाली सेना के हेलीकॉप्टर ने उन्हें राहत सामग्री पहुंचाई।
सामने से मौत का मंजर देखना: होजई के रहने वाले गौतम दास ने कांपती आवाज में आपबीती सुनाते हुए कहा कि उन्होंने मौत को बेहद करीब से देखा और किस्मत से ही Nepal floods Assam laborers rescued की सूची में शामिल होकर नया जीवन पा सके।
आठ अन्य लोगों की तलाश जारी: जहां आठ मजदूर हवाई और सड़क मार्ग से अपने घरों के लिए रवाना हो चुके हैं, वहीं राज्य के आठ अन्य नागरिक अभी भी लापता हैं, जिनकी खोज के लिए अभियान तेज कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री की निगरानी और हेल्पलाइन: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने पहले 16 लोगों के लापता होने की जानकारी देते हुए विशेष हेल्पलाइन शुरू की थी, जिसके जरिए नेपाली अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर बाकी लोगों की तलाश जारी है।






